Khan Sir Hospital ₹23 ECG Treatment – राजनीति में वादे तो बहुत किए जाते हैं, और उनके भाषण भी बहुत अच्छे खासे होते हैं, उनके द्वारा रैलियों में भी करोड़ों रुपये बहा दिए जा रहे हैं। लेकिन जब बात आम आदमी के इलाज की आ जाती है, तो इनके जेब खाली हो जाती है और अस्पताल महंगे हो जाते हैं। ऐसे माहौल में अगर कोई शिक्षक खड़ा होकर कहे — “इलाज महंगा नहीं होना चाहिए” — तो यह सिर्फ खबर ही नहीं होती, एक तरह का आंदोलन बन जाता है।
यही काम करके दिखाया है Khan Sir ने।
ब्लैकबोर्ड से बेड तक – एक शिक्षक की अलग लड़ाई

जिन्हें लोग सिर्फ इनको “कोचिंग वाले खान सर” समझते थे, उन्होंने अब समाज के सेवा की ऐसी मिसाल दे दी है जो कि बड़े-बड़े नेता भी पीछे छूट गए।
यह कभी क्लासरूम में बच्चों को पढ़ाकर उन सभी बच्चों का भविष्य बनाते थे…
वह आज अस्पताल खोलकर गरीबों की ज़िंदगी बचाने का काम कर रहे हैं।
इनका कहना साफ है की, “असली शिक्षा वही है जो समाज के काम आए” — और खान सर ने इसे सच कर के दिखा दिया।
जहाँ इलाज बन गया था लक्ज़री
आज हमारे यह की हकीकत बहुत ज्यादा कड़वी है।
अब के प्राइवेट अस्पतालों में:
- ECG = ₹300–500 में होता है
- डॉक्टर फीस = ₹500+ होता ही है
- बेसिक टेस्ट = हजारों रुपये लग जाते है
यह एक गरीब परिवार के लिए इनकी रकम किसी पहाड़ से कम नहीं होती है।
हमारे गरीब परिवार को अब बीमार होने से ज्यादा डर बिल का लगता रहता है।
और यहीं से शुरू होती है खान सर की सोच —
👉 “इलाज अधिकार है, बिज़नेस नहीं।”
23 रुपये में ECG – सुनकर ही यकीन नहीं होता

हमारे खान सर के अस्पताल में जो रेट सबको सुनाई देते हैं, वो किसी सरकारी योजना जैसे लगते हैं:
- ECG – मात्र ₹20–25 रुपये में हो रहे है
- सस्ती दवाइयाँ मिल रही है
- कम फीस में डॉक्टर कंसल्टेशन मिल रहा है
- बेसिक जांच बेहद कम दाम में हो रहा है
यानी जो सभी टेस्ट बाहर 400–500 में होता है, वही यहाँ अब चाय-नाश्ते के पैसे में हो जा रहा है।
गरीब मरीजों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं हो रहा है।
जनता का सवाल – “ये काम सरकार का था, ना?”
यही बात अब सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से आग की तरह फैल रही है।
लोग खुलकर बोलने लग रहे हैं की:
- नेता रैली में करोड़ों उड़ाते तो हैं
- पोस्टर, बैनर, रोड शो में पैसा बहाते रहते है
- लेकिन अस्पताल बनाने की बारी आती है तो खजाना खाली हो जाता है इनका।
और यह एक शिक्षक अपनी कमाई से ही गरीबों के लिए अस्पताल खोल देता है।
तभी तो लोग पूछ रहे हैं —
👉 “असली हीरो कौन? नेता या खान सर?”
निष्कर्ष:
Khan Sir की पहल ने एक बड़ा सवाल सबके सामने खड़ा कर दिया है —
अगर एक शिक्षक इतना कर सकता है, तो यह सरकार क्यों नहीं कर सकती है?
यहा रैलियाँ, भाषण और वादे तो बहुत हुए…
अब देश को काम करने वाले लोग चाहिए।















Khan sir is real hero 😍😍😍😍😍