IPC Section 375 क्या है? बलात्कार की कानूनी परिभाषा समझिए

Published On: February 28, 2026
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IPC Section 375 Rape Law Explained in Hindi

भारत में महिलाओं की सुरक्षा से बड़ी चीज कुछ भी नहीं है और इसी वजह से इस चीज से जुड़ी सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण आपराधिक प्रावधान तो IPC Section 375 के अन्दर है। और यह धारा हमे बताती है कि किन सभी परिस्थितियों में व्यक्ति द्वारा किसी भी कृत्य को बलात्कार (Rape) माना जाएगा।

आमतौर पर लोग सिर्फ शब्द ही सुनते रहते हैं, लेकिन इस चीज की कानूनी परिभाषा क्या है, यह समझना हमारे लिए बेहद जरूरी होता है। क्योंकि अदालत केवल आरोप ही नहीं देखती, बल्कि कानूनी तत्वों (legal ingredients) के आधार को देख कर ही फैसला करती है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 375 क्या है?

IPC Section 375, सीधे और सरल तरीके से यह परिभाषित करती है कि कब किसी भी पुरुष द्वारा किसी भी महिला के साथ किया गया यौन संबंध बलात्कार की श्रेणी में आ जाएगा।

सरल शब्दों में, यदि:

  • इसमें महिला की सहमति (Consent) नहीं ली गई हो
  • सहमति जबरदस्ती या धमकी से ली गई है
  • महिला नाबालिग है
  • महिला मानसिक रूप से असमर्थ है

तो यह अपराध सीधे Section 375 के अंतर्गत आ जाता है।

यहाँ सबसे महत्वपूर्ण शब्द तो यही है की —  महिला की Consent (सहमति)

कानून के अनुसार consent का साफ और सीधा मतलब यही होता है:

स्पष्ट के साथ स्वतंत्र और स्वेच्छा से दिया गया निर्णय।

अगर सहमति:

  • डर के साथ ली गई हो
  • नशे की हालत में ली गई हो
  • धोखे से ली गई हो

तो वह एक तरह से वैध सहमति नहीं मानी जाएगी।

IPC Section 375 और Section 376 में अंतर

बहुत सारे लोग तो दोनों को एक जैसा ही समझ लेते हैं।

  • Section 375 – यह कानून बलात्कार की परिभाषा बताती है
  • Section 376 – यह कानून बलात्कार की सज़ा बताती है

यानी 375 “क्या है जो की अपराध” बताती है, जबकि 376 “सज़ा कितनी होगी” यह तय करने का काम करती है।

📊 IPC Section 375 – कानूनी स्थिति

स्थितिक्या यह बलात्कार है?लागू धारा
बिना सहमति यौन संबंधहाँIPC 375
नाबालिग (18 वर्ष से कम)हाँIPC 375
धोखे से सहमतिहाँIPC 375
वैध और स्वेच्छा से सहमतिनहींअपराध नहीं

Is Section 375 a Real Story?

नहीं।
Section 375 यह कोई कोई फिल्म या कहानी तो नहीं है।

यह एक तरह से वास्तविक कानूनी प्रावधान है जो की 1860 से IPC का हिस्सा बनी हुए है, हालांकि समय-समय पर इसमें आपको संशोधन देखने को मिलते रहते हैं, जो की खासकर 2013 के आपराधिक कानून संशोधन के बाद देखने को मिलती है।

How Does 375 IPC Relate to Gender?

यह एक सबसे बड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।

IPC Section 375 वर्तमान कानून के अनुसार:

  • अपराधी पुरुष ही क्यू माना जाता है
  • पीड़िता महिला ही क्यू मानी जाती है

हालांकि इस gender-neutral rape law को लेकर बहुत सारी बहस चलती रहती है। लेकिन बहुत से कई कानूनी विशेषज्ञ का यही मानना होता हैं कि कानून को gender-neutral होना चाहिए, लेकिन यह वर्तमान IPC 375 में इसकी संरचना महिला पीड़िता को केंद्र में रख कर बनाई गई थी।

2013 Amendment के बाद क्या बदला?

हम आपको बता दी की निर्भया केस के बाद 2013 में इस कानून में बहुत ही बड़ा संशोधन किया गया।

अब:

  • “Consent” की परिभाषा स्पष्ट की गई
  • बहुत से प्रकार के यौन जैसे अपराध जोड़े गए
  • सज़ा कठोर से कठोर की गई

इस संशोधन ने Section 375 को बहुत ज्यादा सशक्त बना दिया है।

Section 375 में सज़ा कितनी होती है?

Section 375 सिर्फ अपराध की परिभाषा ही आपको देती है।
लेकिन सज़ा Section 376 के तहत दी जाती है।

सामान्य स्थिति में:

  • न्यूनतम 10 वर्ष की सज़ा सुनाई जाती है
  • गंभीर मामलों में उम्रकैद भी दी जा सकती है

लेकिन विशेष परिस्थितियों में सज़ा और भी ज्यादा कठोर की जा सकती है।

निष्कर्ष: IPC Section 375 को समझना क्यों जरूरी है?

यह IPC Section 375, केवल एक धारा ही नहीं मानी जा सकती बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का महत्वपूर्ण कानूनी आधार भी माना जा सकता है।

यह धारा हम लोगों को सिखाती है कि:

  • सहमति का महत्व क्या है
  • कानून किसे बलात्कार मानता है
  • और अदालत किन तथ्यों पर निर्णय देती है

कानून का आपके पास सही जानकारी ही आपके गलतफहमियों को दूर कर सकती है।

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