IPC Fundamental Principles in Hindi,भारतीय दंड संहिता यानी की IPC (Indian Penal Code) यह सिर्फ एक प्रकार की अपराधों की सूची नहीं है, बल्कि यह कुछ मौलिक सिद्धांतों (Fundamental Principles) पर भी आधारित है।
अगर IPC को आपको सही तरीके में समझना है, तो सबसे पहले आपको यह जानना बहुत ज़रूरी है कि भारतीय दंड कानून की नींव किन principles पर टिकी हुई है।
IPC के Fundamental Principles क्या होते हैं?
Fundamental principles एक तरह के ऐसे मूल विचार होते हैं, जिन पर पूरा criminal law टिका रहता है।
IPC के जीतने भी sections और punishments है इन्हीं principles को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
इन principles का मकसद बस यह सुनिश्चित करना होता है कि:
- कानून सबके लिए समान होना चाहिए
- किसी निर्दोष को सजा न मिले जाए
- अपराध और सजा के बीच संतुलन बना कर रखे
Principle of Legality: बिना कानून अपराध नहीं
IPC का सबसे अच्छा बुनियादी सिद्धांत यह है कि जब तक भी कोई काम कानून के द्वारा अपराध घोषित न हो जाए, तब तक उस काम को अपराध नहीं माना जा सकता हैं।
इस principle के तहत:
- किसी भी व्यक्ति को अपने आप से अपराधी नहीं ठहराया जा सकता है
- दोषी को सजा केवल उसी अपराध के लिए मिलेगी जो IPC में लिखा हुआ हो
यह principle नागरिकों को arbitrary punishment से बचाए रखता है।
Actus Non Facit Reum: अपराध के लिए मंशा ज़रूरी
IPC के अनुसार केवल कोई भी कार्य (Act) करना ही अपराध नहीं माना जाता है।
बल्कि उस कार्य के पीछे आपराधिक मंशा (Guilty Mind) भी होना चाहिए।
इस principle का अर्थ है:
- किसी के द्वारा गलती से हो गया काम अपराध नहीं माना जाएगा
- इरादे और मानसिक स्थिति की जांच ज़रूर से की जाएगी
इस वजह से IPC में बहुत ज्यादा intention और knowledge को बहुत महत्व दिया गया है।
Principle of Mens Rea: अपराधी मानसिकता की भूमिका
Mens Rea का साफ मतलब यह होता है अपराध करने की मानसिकता को देखना।
IPC का यह मानना है कि बिना guilty mind के व्यक्ति को अपराधी ठहराना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता है।
इस principle के कारण:
- accident और crime में फर्क किया जाता है
- punishment तय करते समय intention को देखना जरूरी है
Mens rea भारतीय दंड कानून को मानवीय बनाता है।
Principle of Punishment: सजा का उद्देश्य क्या है?
IPC में सजा का उद्देश्य सिर्फ बदला लेना ही नहीं होता है।
Punishment का मकसद यह होता है:
- अपराधी को सुधारना है
- समाज में डर पैदा करना है
- भविष्य में अपराध रोकना है
इसी कारण हेतु IPC में अलग-अलग प्रकार की सजाएं निर्धारित किया गया हैं।
Principle of Proportionality: सजा और अपराध में संतुलन
IPC का यह मानना है कि सजा भी अपराध के अनुपात में होनी चाहिए।
छोटे अपराध के लिए बड़ी सजा देना अन्याय माना जाएगा।
इस principle के तहत:
- minor offence के लिए हल्की सजा होती है
- serious offence के लिए कठोर सजा दी जाती है
यह principle न्यायिक विवेक को मजबूत बनाए रखता है।
Principle of Equality Before Law
IPC सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू किया जाता है।
कोई भी व्यक्ति:
- पद
- पैसा
- हैसियत
के आधार पर कानून से ऊपर नहीं होता है।
यही principle कानून के सामने समानता सुनिश्चित करने का काम करता है।
General Exceptions का सिद्धांत – IPC Fundamental Principles in Hindi
IPC का यह भी मानना है कि हर परिस्थिति में सजा देना उचित नहीं होता है।
इसीलिए General Exceptions भी बनाए गए हैं।
इनका उद्देश्य:
- आत्मरक्षा में किए गए कार्य को अपराध नहीं माना जाएगा
- मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को दंड देना गलत है
यह principle IPC को व्यावहारिक रूप से बनाया गया है।
IPC Sections & Chapters Explained in Hindi: Beginners के लिए Complete Guide – link













