Section 307 Explained in Hindi: Attempt to Murder कब बनता है अपराध?

Published On: February 1, 2026
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IPC Section 307 attempt to murder को दर्शाती कानूनी प्रतीकों और न्याय व्यवस्था से जुड़ी छवि

Section 307 Explained in Hindi- क्या आप जानते हैं की भारतीय दंड संहिता (IPC) की Section 307 को आम भाषा में Attempt to Murder कहा जाता है यानी की हत्या के प्रयास करने की धारा कहा जाता है।
अक्सर लोगों को crime news में हमेशा सुनने को मिल ही जाता है कि किसी आरोपी पर Section 307 लगा दिया गया है, लेकिन यह समझना आपके लिए बहुत ही ज़रूरी है कि हर गंभीर हमला Section 307 ही नहीं बनता है

चलिए हम अच्छे से समझते हैं की क्या होता है section307 का मामला?

Section 307 IPC क्या है?

हम आपको बता दे की Section 307 IPC के उस स्थिति पर लागू होती है जब भी कोई व्यक्ति किसी की हत्या करने की नीयत से ऐसा कुछ कार्य कर देता है, जो की अगर वो कार्य सफल हो जाता है, या मौत हो सकती थी।
तो इस धारा में यह ज़रूरी नहीं है कि वास्तव में किसी की मृत्यु ही हो जाए तो यहाँ सबसे ज्यादा इरादा (intention) सबसे महत्वपूर्ण होता है।

यानी अगर कोई भी आरोपी का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की जान लेना ही था, तो यह एक तरह से अपराध पूरा न होने के बावजूद Section 307 लगा दी जा सकती है।

Attempt to Murder का मतलब क्या है?

इस Attempt to Murder का अर्थ साफ है कि आरोपी ने:

  • हत्या करने का इरादा बनाया भी था
  • उस इरादे को पूरा करने के लिए ठोस कदम भी उठाया था

भले ही वह पीड़ित किसी तरह से बच गया हो, लेकिन यदि अदालत को यह लगता जाता है कि आरोपी का उद्देश्य हत्या ही करना था, तो यह मामला Section 307 के अंतर्गत तुरंत आएगा।

Section 307 के जरूरी तत्व क्या हैं?

Section 307 तभी लागू किया जाता है जब कुछ तो मूल बातें साबित होनी चाहिए।
सबसे पहले तो यही देखा जाता है कि आरोपी के मन में हत्या की मंशा थी भी या नहीं थी। इसके बाद यह जांच तो जरूर किया जाता है कि किया गया जो कार्य है वो कितना खतरनाक है क्या उससे व्यक्ति कि मृत्यु हो सकती थी।

इन मामलों में चोट की गंभीरता से ज़्यादा आरोपी का इरादा ध्यान रखना ही मायने रखता है।

Section 307 और Section 302 में क्या अंतर है?

यह आपको जानना बहुत ही जरूरी है की Section 302 तब लगाई जाती है जब वास्तव में हत्या हो जाती है, जबकि Section 307 तब लगती है जब की हत्या का प्रयास हुआ हो लेकिन उस व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई हो।

यह दोनों धाराओं में intention common factor का ही है, फर्क सिर्फ इतना है की अपराधिक द्वारा किए गए कार्य, परिणाम (result) क्या देता है।
अगर इसमें पीड़ित की मौत हो जाती है, तो यह मामला Section 302 में बदल सकता है।

Section 307 में सजा क्या होती है?

इस Section 307 का IPC में सजा काफ़ी कठोर हो सकती है।
आईए समझते है कानून के अनुसार:

  • आरोपी को 10 साल तक की जेल दी जाती है
  • या उम्रकैद की भी सजा दी जा सकती है
  • और जुर्माना भी दिया जा सकता है

यदि पीड़ित को गंभीर चोट आई हो, तो सजा और भी सख्त किया जा सकता है।

Section 307 का Practical महत्व

यह Section 307 पुलिस और अदालत दोनों के लिए बहुत संवेदनशील धारा में से एक मानी जाती है।
अक्सर FIR में यह धारा को जोड़ दिया जाता है, लेकिन यह trial के दौरान अगर व्यक्ति का intention साबित नहीं किया जाता है, तो इसे तुरंत हटाया भी जा सकता है।

इसलिए यह Section 307 केवल आरोप के लिए ही नहीं होता है, बल्कि सबूतों पर आधारित निर्णय होता है।

निष्कर्ष: Section 307 Explained in Hindi

यह Section 307 IPC तभी लागू किया जाता है जब:

  • हत्या की नीयत साफ़ हो दिखाई देती हो
  • किया गया कार्य जानलेवा प्रकृति का हो

हर हमला Attempt to Murder ही नहीं होता है, लेकिन जहाँ इरादा हत्या का हो, वहाँ तो Section 307 एक गंभीर अपराध बन जाता है।

IPC के Fundamental Principles: भारतीय दंड कानून की नींव क्या है? – link

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