IPC aur CrPC mein antar को अच्छे से जानते है
भारत के कानून में ज्यादातर ये दो शब्द बहुत ही सुनने को मिलते हैं – IPC और CrPC।
अधिकतर लोगों के दिमाक में यह होता है की ये दोनों एक ही है, लेकिन असल में यह दोनों का काम अलग-अलग होते है।
इस लेख में हम आपको बिल्कुल ही आसान भाषा में समझा देंगे कि IPC क्या है और CrPC क्या है और दोनों में फर्क क्यों होना जरूरी है।
IPC क्या है?
IPC (Indian Penal Code) यह वह कानून है जो आपको यह बताता है कि:
- कौन-सा काम अपराध माना जाएगा
- और उस अपराध की सजा क्या होनी चाहिए
मतलब आप समझिए IPC, crime और punishment को define करता है।
उदाहरण:
चोरी, हत्या, धोखाधड़ी, मारपीट – ये सब एक तरह का अपराध हैं और इनकी सजा IPC में लिखी गई है।
CrPC क्या है?
CrPC (Code of Criminal Procedure) यह वह कानून है जो आपको यह बताता है कि:
- अपराध होने के बाद आगे क्या होना चाहिए
- पुलिस और कोर्ट को किस तरह से काम करना चाहिए
यानि आप समझिए की CrPC पूरा legal process को समझाता है।
IPC और CrPC में मुख्य अंतर
| आधार | IPC | CrPC |
| काम | अपराध और सजा बताता है | केस की प्रक्रिया बताता है |
| Focus | क्या गलत है | कानून कैसे चलेगा |
| Nature | Substantive Law | Procedural Law |

एक आसान उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी ने चोरी की हो। तब उसके साथ क्या होगा समझिए
- IPC यह बताएगा: चोरी एक तरह का अपराध है और उसकी सजा क्या दी जाएगी
- यह CrPC बताएगा:
- FIR कैसे दर्ज होगी
- पुलिस जांच कैसे करेगी
- कोर्ट में केस कैसे चलेगा
👉 यानी IPC बिना CrPC के अधूरा है।
Police और Court में इनका Role
- IPC: कौन-सी धारा लगानी चाहिए
- CrPC:
- Arrest कैसे किया जाएगा
- Trial कैसे चलेगा
- Decision कैसे आएगा
दोनों को मिलकर ही न्याय प्रक्रिया को पूरा किया जाता हैं।
याद रखने की आसान Trick
- IPC = क्या अपराध है?
- CrPC = केस कैसे चलेगा?
बस यही दोनों में फर्क है।
निष्कर्ष:
- IPC सिर्फ अपराध और सजा को तय करता है
- CrPC कानून की प्रक्रिया को बताता है
- दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे से हैं
तो आपको कैसा लगा समझ आया की नहीं कमेन्ट में जरूर बताए।
भारतीय दंड संहिता (IPC): वो कानून जो हर भारतीय को ज़रूर जानना चाहिए! – link













