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भारत ने डिजिटल भरतब में एक बड़ा कदम उठा लिया है। अब AI और Deepfake फोटो और विडिओ के गलत उपयोग करने पर कड़े नियम लागू होने वाले हैं। इसका मतलब है कि आपके सामने आने वाली नकली वीडियो, फोटो या किसी भी तरह की डिजिटल छवि पर सरकार सख्त लेबलिंग और जांच करेगी क्युकी ये बहुत तेजी से बढ़ रही हैं और गलत कामों में ये जादा उपयोग हो रहे हैं।
क्या है Deepfake और AI दुरुपयोग?
Deepfake तकनीक से किसी की असली तस्वीर या वीडियो को बदलकर गलत फोटो विडिओ के लिए भी उपयोग किया जा सकता हैं मतलब एक असली फोटो से कैसी भी फोटो बन जा रही हैं AI की मदद से यह और भी आसान हो गया है। इस तकनीक का गलत इस्तेमाल फेक न्यूज़ फैलाने, लोगों को गुमराह करने या साइबर अपराध करने में किया जा सकता है इसीलिए सरकार इसपेर कड़े कानून ला रही हैं।

भारत का नया कदम क्यों जरूरी है?
भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं नए-नए AI टूल्स आते जा रहे, ऐसे में नकली और भ्रामक सामग्री से लोगों की सोच और राय प्रभावित हो सकती है। सरकार का मकसद है कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा, पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखा जाए जिससे किसी भी व्यक्ति के अन्दर डर न बन पाए की उसकी फोटो गलत न बन जाए।
क्या बदलने वाला है?
- अब किसी भी AI या Deepfake सामग्री पर सटीक लेबल मतलब की उस फोटो या विडिओ पर एक ऐसा स्टिकर उस प्लेटफॉर्म का होना चाहिए जिससे देखने वाले व्यक्ति को पता चल सके की ये फोटो या विडिओ AI के जरिए बनई गई है ऐसे स्टिकर को लगाना अनिवार्य होगा।
- नकली फोटो,विडिओ या कोई अन्य छवि फैलाने वाले पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपाय और निगरानी बढ़ाई जाएगी।
क्या इसका फायदा होगा?
- लोगों को पता रहेगा कि कौन सी सामग्री असली है और कौन सी नकली।
- फेक न्यूज़ और साइबर अपराध कम होंगे।
- डिजिटल दुनिया में भरोसेमंद वातावरण बनेगा।
इस कदम से भारत ने डिजिटल दुनिया में अपनी सुरक्षा और नियम-कानून की पकड़ मजबूत की है। अगर आप सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानना आपके लिए जरूरी है कि जो चीज आप देख रहे हैं वो एक सच हैं या झूठ, इससे अब आप को सच का पता चलेगा सच और झूठ में आप सच का आसानी से पता कर सकते हैं।













